Desh Bhakti Poem in Hindi

Desh Bhakti Poem in Hindi Language

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Desh Bhakti Poem in Hindi Language

“मेरा पहलू बनो तुम और मैं आगोश हो जाऊं”

मेरा पहलू बनो तुम और मैं आगोश हो जाऊं,
दिल की हर बात कह दूं और फिर खामोश हो जााऊं।

किसी प्याले की कूव्वत ही कहाँ, बहका सकेे मुुझको..,
निगाहों से जरा हँस दो ..कि मैैं ..मदहोश हो जाऊं।

तुम्हारा रंग जो मिल जाये मुझ में… मैं भी खिल जाऊं,
पड़ो तुम धूप बन के सुबह की.. मैं ओस हो जाऊं।

परत इक धूल की जम सी गयी है मेरे दामन पर..,
अगर तुम बूंद बन जाओ तो मैं फिरदौस हो जाऊं।

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स्वतंत्रता दिवस पर ‘विशेष’…

सिमट के रह गया है जज़्बा वो अब चंद लफ्जों में,
लाओ.. इक फ़ोन दो, मैं भी सरफरोश हो जाऊं..!!

-Durgesh Yadav  

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“सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा गीत”

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिस्ताँ हमारा,

ग़ुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में
समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा,

परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का
वो संतरी हमारा, वो पासबाँ हमारा,

गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियाँ
गुलशन है जिसके दम से, रश्क-ए-जिनाँ हमारा, 

ऐ आब-ए-रूद-ए-गंगा वो दिन है याद तुझको
उतरा तेरे किनारे, जब कारवाँ हमारा,

मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा, 

यूनान-ओ-मिस्र-ओ- रोमा, सब मिट गए जहाँ से
अब तक मगर है बाकी, नाम-ओ-निशाँ हमारा,

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-जहाँ हमारा,

‘इक़बाल’ कोई महरम, अपना नहीं जहाँ में
मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहाँ हमारा, 

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसताँ हमारा…!!

मोहम्मद इक़बाल

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Desh Bhakti Kavita in Hindi

चाँद, सूरज-सा तिरंगा
प्रेम की गंगा तिरंगा
विश्व में न्यारा तिरंगा
जान से प्यारा तिरंगा
सारे हिंदुस्तान की
बलिदान-गाथा गाएगा
ये तिरंगा आसमाँ पर
शान से लहराएगा।

शौर्य केसरिया हमारा
चक्र है गति का सितारा
श्वेत सब रंगों में प्यारा
शांति का करता इशारा
ये हरा, खुशियों भरा है
सोना उपजाती धरा है
हर धरम, हर जाति के
गुलशन को ये महकाएगा।

ये है आज़ादी का परचम
इसमें छह ऋतुओं के मौसम
इसकी रक्षा में लगे हम
इसका स्वर है वंदेमातरम
साथ हो सबके तिरंगा
हाथ हो सबके तिरंगा
ये तिरंगा सारी दुनिया
में उजाला लाएगा..!!

– सुनील जोगी

 

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जय जन भारत जन- मन अभिमत

जन गणतंत्र विधाता
जय गणतंत्र विधाता

गौरव भाल हिमालय उज्जवल
हृदय हार गंगा जल
कटि विंध्याचल सिंधु चरण तल
महिमा शाश्वत गाता
जय जन भारत …

हरे खेत लहरें नद-निर्झर
जीवन शोभा उर्वर
विश्व कर्मरत कोटि बाहुकर
अगणित-पद-ध्रुव पथ पर
जय जन भारत …

प्रथम सभ्यता ज्ञाता
साम ध्वनित गुण गाता
जय नव मानवता निर्माता
सत्य अहिंसा दाता

जय हे- जय हे- जय हे
शांति अधिष्ठाता
जय -जन भारत…

-सुमित्रा नंदन पंत 

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तबसे अब में खूब,मचा विकास का जनादेश !
एसी तैसी हुआ ,बहुत बदल गया अपना देश !!
बहुत बदल गया अपना देश !
अंग्रेजी का भाव बढ़ गया ,देश हुआ परदेश !
पगड़ी गमछा लाज लगे,भाए बिलायती भेष!!
बहुत बदल गया अपना देश !
दाल भात पचता नहीं,रोग बर्गर पिज्जा की तैस !
शौखिनी में बड़ी गरीबी,भुगते लाग बाज की रेस !!
बहुत बदल गया अपना देश !
माँ बहन अफसोस हो गयी,बिटिया हुई कलेस!
कलंकओढ़ बहू जल गयी,कलमुही है सन्देश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
गवांर मरे मजदूरी बिन  ,पढे़-लिखे सब शेष !
करता धरता आलस बांचे,बचा न कुछ उद्देश !!
बहुत बदल गया अपना देश !
साधू सन्त व्यापार करे ,चोर उचक्का आदेश !
हुआ निकम्मा अभिेनेता ,जग बांटे सब उपदेश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
शाकाहारी खेत खरीहान ,उजाड़ बसे सब ऐस!
मांसाहारी भूख जीभ का, शमशान बना ए द्वेष!!
बहुत बदल गया अपना देश !
चारा सारा राजनीति खा गया,गाये खाए आवेश !
किसान मरे बिन पानी के,न लगा किसीको ठेस !!
बहुत बदल गया अपना देश !
पत्थर खुद पर दे मारे ,कुछ उन्मादी तर्क अन्वेष !
आम बात हुई सहादत ,क्या सरकारी अध्यादेश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
बहुत बदल गया अपना देश..!!

– अरविंद कुमार तिवारी (बामपुर, इलाहाबाद)

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सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
हम बुलबुलें हैं इसकी वह गुलिस्तां हमारा ॥

ग़ुर्बत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में।
समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा ॥

परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमां का।
वो संतरी हमारा वो पासवां हमारा ॥

गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियां।
गुलशन है जिसके दम से रश्के जिनां हमारा॥

ऐ आबे रोदे गंगा वह दिन है याद तुझको।
उतरा तेरे किनारे जब कारवां हमारा ॥

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा ॥

यूनान, मिस्र, रोमा सब मिट गए जहां से।
अब तक मगर है बाकी नामों निशां हमारा ॥

कुछ बात है कि हस्ती मिटती मिटाये।
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जमां हमारा ॥

‘इक़बाल’ कोई महरम अपना नहीं जहां में।
मालूम क्या किसी को दर्दे निहां हमारा ॥

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलिसतां हमारा..!!

– इक़बाल

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Desh Bhakti Kavita in Hindi

यारा प्यारा मेरा देश,
सजा – संवारा मेरा देश॥

दुनिया जिस पर गर्व करे,
नयन सितारा मेरा देश॥

चांदी – सोना मेरा देश,
सफ़ल सलोना मेरा देश॥

सुख का कोना मेरा देश,
फूलों वाला मेरा देश॥

झुलों वाला मेरा देश,
गंगा यमुना की माला का मेरा देश॥

फूलोँ वाला मेरा देश
आगे जाए मेरा देश॥

नित नए मुस्काएं मेरा देश
इतिहासों में नाम लिखायें मेरा देश..!!

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तिरंगा लहराता है अपनी पूरी शान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

आज़ादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी।
लाखों लोगों ने प्राणों से कीमत बड़ी चुकाई थी।।

व्यापारी बनकर आए और छल से हम पर राज किया।
हमको आपस में लड़वाने की नीति अपनाई थी।।

हमने अपना गौरव पाया, अपने स्वाभिमान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

गांधी, तिलक, सुभाष, जवाहर का प्यारा यह देश है।
जियो और जीने दो का सबको देता संदेश है।।

प्रहरी बनकर खड़ा हिमालय जिसके उत्तर द्वार पर।
हिंद महासागर दक्षिण में इसके लिए विशेष है।।

लगी गूँजने दसों दिशाएँ वीरों के यशगान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

हमें हमारी मातृभूमि से इतना मिला दुलार है।
उसके आँचल की छैयाँ से छोटा ये संसार है।।

हम न कभी हिंसा के आगे अपना शीश झुकाएँगे।
सच पूछो तो पूरा विश्व हमारा ही परिवार है।।

विश्वशांति की चली हवाएँ अपने हिंदुस्तान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से..!!

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नदी, झील, झरनों की झाँकी मनमोहक है,
सुमनों से सजी घाटी-घाटी मेरे देश की।
सुरसरिता-सी सौम्य संस्कृति की सुवास,
विश्व भर में गई है बाँटी मेरे देश की।
पूरी धऱती को एक परिवार मानने की,
पावन प्रणम्य परिपाटी मेरे देश की।
शत-शत बार बंदनीय अभिनंदनीय, 

चंदन से कम नहीं माटी मेरे देश की।।

कान्हा की कला पे रीझकर भक्ति भावना
के, छंद रचते हैं रसखान मेरे देश में।
तुलसी के साथ में रहीम से मुसलमान,
है निभाते कविता की आन मेरे देश में।

बिसमिल और अशफाक से उदाहरण,
साथ-साथ होते कुरबान मेरे देश में।
जब भी ज़रूरत पड़ी है तब-तब हुए,
एक हिंदू व मुसलमान मेरे देश में..!!

-नीरज पांडेय

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Desh Bhakti Kavita in Hindi

यह देश हमारा है, हमारा है हमारा
इस देश का कण कण हमें प्यारा हमें प्यारा
इस देश के इतिहास में
गौरव की कथाएँ
इस देश के बलिदान की
चलती हैं हवाएँ
इस देख का भूगोल है हम सबको सहारा
यह देश हमारा है, हमारा है हमारा

भंडार संपदा का
हर पर्वत यहाँ रहा
पानी नहीं नदियों में
जीवन यहाँ बहा
मोती उड़ेलता है यह सिंधु भी खारा
यह देश हमारा है, हमारा है हमारा

इस देश की संस्कृति
रही सौहार्द सनी है
संस्कृति सहिष्णुता के
विचारों से बनी है
दुनिया का भला हमने ही हरदम है विचारा
यह देश हमारा है, हमारा है हमारा

इस देश की मिट्टी में
धर्म फूले फले हैं
हम उँगलियाँ सभी की
थाम थाम चले हैं
यह देश रहा है सभी देशों का दुलारा
यह देश हमारा है, हमारा है हमारा

इस देश ने उपकार हैं
हम पर बहुत किए
हो कौल जिएँ या मरें
हम देश के लिए
हर साँस करे देश के गौरव का पसारा
यह देश हमारा है, हमारा है हमारा..!!

– श्रीकृष्ण सरल

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भारत मेरा प्यारा देश,
सब देशो से न्यारा देश|
भारत मेरा प्यारा देश,
सब देशो से न्यारा देश|

हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई
मिलकर रहते सिख-ईसाई|
हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई
मिलकर रहते सिख-ईसाई|

इसकी धरती उगले सोना,
ऊँचा हिमगिरी बड़ा सलोना|
इसकी धरती उगले सोना,
ऊँचा हिमगिरी बड़ा सलोना|

सागर धोता इसके पाँव,
हैं इसके अलबेले गाँव|
सागर धोता इसके पाँव,
हैं इसके अलबेले गाँव|

भारत मेरा प्यारा देश,
सब देशो से न्यारा देश..!!

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ये वक्त भी रूक जाएगा,
आसमाँ झुक जाएगा,
धरती कहे तू आ गया,
कोई भी ना बच पाएगा,
बहानें लहू हम आयें हैं,
जिन्दगी देनें हम आयें हैं,
हर शाख अब लहराएगा,
हर फूल मुस्कुराएगा,
ताकत हमारी चट्टानों सी,
मुहब्बत हमारी फूलों सी,
सारा जहाँ मुस्कुराएगा,
जवान विजय होके जब आएगा,
ये वक्त भी रूक जाएगा,
आसमाँ झुक जाएगा,
धरती कहे तू आ गया,
कोई भी ना बच पाएगा..!!

–कवि मनीष

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Desh Bhakti Kavita in Hindi

कोई शक नही जिस महबूब की वफा पे मुझको ,
मैं वही आशिके वतन हूँ ,
जिस बाग़ मे बस्ती है मेरी हर एक साँस ,
उसी बाग़ का मैं एक गुले चमन हूँ ।।

मेरे मुल्क की हिफाज़त ही मेरा फ़र्ज है
और मेरा मुल्क ही मेरी जान है ,
इस पर कुर्बान है मेरा सब कुछ ,
नही इससे बढ़कर मुझको अपनी जान है।।

अगर हो जाऊँ शहीद वतन पर तो जाऊँगा शान से ,
कह दूँगा उस खुदा से दीनो ईमान से ,
वो हिन्दुस्तान की ज़मीन प्यारी बहुत है ,
इस पर शहादत का जज़बा अब भी बहुत है..!!

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हरी नीली लाल पीली
बड़ी बड़ी तेज़ रफ्तार मोटरें
और उनके बीच दबा,
सहमा, डरा सा
आम आदमी

हरे भरे लहराते बड़े बड़े
पेडो के नीचे बिखरी पन्निया
बारिश की प्रदुषण धुली बूँदें
आँखों से बरसती

सड़क पर चाय के ठेले पर
वही बुढ़िया और
चाय पहुचता
वही छोटू

स्कूल से निकलता अल्हड, मस्त
किल्कारिया भरता बचपन
और पास ही सड़क पर
भीख मांगते नन्हे,
असमय बड़े हो चुके
छोटे बच्चे

पाँच सितारा अस्पताल का
उद्घाटन करते प्रधान मंत्री
की तस्वीर को घूरती
सरकारी अस्पताल में
बिना इलाज मरे शिशु की लाश

और इन सबको
कर उपेक्षित
विकास के दावो की होर्डिंग निहारता मैं
मन में दृढ़ करता चलता विश्वास
की हाँ 2020 में
हम विकसित हो ही जाएँगे
दिल को बहलाने को ग़ालिब..!!

-मयंक सक्सेना

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Desh Bhakti Poem in Hindiअभी-अभी बम के धमाको़ से
चीख़ उठा है शहर
बच्चे, बूढे,जवान
खून से लथपथ
अनगिनत लाशों का ढेर
इस हृदय विदारक वारदात की
कहानी कह रहा है

ओह!
यह कैसी आजा़दी है
जो घोल रही है
मेरे और तुम्हारे बीच
खौ़फ, आग और विष का धुआँ?
हमारे होठों पे थिरकती हंसी को
समेटकर
दुबक गई है
किसी देशद्रोही की जेब में

और हम
चुपचाप देख रहे हैं
अपने सपनों को
अपने महलों को
अपनी आकांक्षाओं को
बारूद में जलकर
राख़ में बदलते हुए..!!

-हरकीरत कलसी ‘हकी़र’

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मेरा यह मानना है
मेरा भारत सब दशों से महान है।
नहीं है ऐसा कोई अन्य देश,
युगों बीतने पर भी वैसा ही है परिवेश,
विभिन्नता में एकता के लिए, प्रसिद्ध है हर प्रदेश,
प्रेम, अहिंसा, भाईचारे का जो है देता संदेश।
मेरा यह मानना है
मेरा भारत सब देशों से महान है।
ऋषि-मुनियों की जो है तपोभूमि,
कई नदियों से भरी है ये पुण्य भूमि,
प्रकृति का है मस्त नजारा यहाँ,
छोड़ इसे जाए हम और अब कहाँ
मेरा यह मानना है
मेरा भारत सब देशों से महान है,
जाति, धर्म का है जहाँ अनूठा संगम,
देशभक्ति की लहर में, भूल जाते सब गम,
देश के लिए मर मिटने को सब है तैयार,
अरे दुनिया वालों, हम है बहुत होशियार,
न छेड़ो हमें, कासर नहीं है हम खबरदार,
अपनी माँ को बचाने, लेगें हम भी हथियार।
मेरा यह मानना है
मेरा भारत सब देशों से महान है..!!

-सी आर राजश्री

Desh Bhakti Kavita in Hindi

Desh Bhakti Shayari in Hindi

Updated: January 25, 2018 — 12:03 pm

6 Comments

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  1. Not a perfect kavitia

  2. Wonderful! lovely!

  3. How r u niki

  4. Acchi kavita hain….Very nice poems

  5. Satya Prakash Sharma vijayur (sheopur)

    Very nice every poem.

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