Desh Bhakti Poem in Hindi

Desh Bhakti Poem in Hindi Language

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Desh Bhakti Poem in Hindi Language

“मेरा पहलू बनो तुम और मैं आगोश हो जाऊं”

मेरा पहलू बनो तुम और मैं आगोश हो जाऊं,
दिल की हर बात कह दूं और फिर खामोश हो जााऊं।

किसी प्याले की कूव्वत ही कहाँ, बहका सकेे मुुझको..,
निगाहों से जरा हँस दो ..कि मैैं ..मदहोश हो जाऊं।

तुम्हारा रंग जो मिल जाये मुझ में… मैं भी खिल जाऊं,
पड़ो तुम धूप बन के सुबह की.. मैं ओस हो जाऊं।

परत इक धूल की जम सी गयी है मेरे दामन पर..,
अगर तुम बूंद बन जाओ तो मैं फिरदौस हो जाऊं।

स्वतंत्रता दिवस पर ‘विशेष’…

सिमट के रह गया है जज़्बा वो अब चंद लफ्जों में,
लाओ.. इक फ़ोन दो, मैं भी सरफरोश हो जाऊं..!!

Durgesh Yadav  

Durgesh Yadav

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