Heart Touching Story In Hindi

Heart Touching Story In Hindi

Best Collection of Heart Touching Story in Hindi. Get emotional or feel love but your heart is going to break after reading all these true and heart touching love stories. Very Emotional and Heart Broken Stories. Today I am going to tell you short stories that are so emotional. You can read short and super heart touching stories it takes only a few minutes to read a story. A Heart Touching Story of Parents and old lady and labor etc. Please read all these stories very carefully. 

 

Heart Touching Story In Hindi

 

एक Couple को शादी के 11 साल बाद एक लड़का हुआ। वे बहोत ही प्रेमी युगल (Couple) थे और उनका लड़का उनकी आखो का तारा था।

एक सुबह, जब वह लड़का 2 साल का था, लड़के के पिता (पति ने)एक दवाई की बोतल खुली देखि। उसे काम पर जाने के लिए देरी हो रही थी इसलिए उसने अपनी पत्नी से उस बोतल को ढक्कन लगाने और अलमारी में रखने कहा। लड़के की मम्मी रसोईघर में तल्लिन थी, वो ये बात पूरी तरह से भूल गयी थी।

लड़के ने वो बोतल देखि और खेलने के इरादे से उस बोतल की ओर गया, बोतल के कलर ने उसे मोह लिया था इसलिए उसने उसमे की दवाई पूरी पी ली थी। उस दवाई की छोटे बच्चो को छोटी सी मात्रा भी जहरीली हो सकती थी।

जब वह लड़का निचे गिरा, तब उसकी मम्मी उसे जल्द से जल्द दवाखाने ले गयी जहा उसकी मौत हो गयी। उसकी मम्मी पूरी तरह से हैरान हो गयी थी, वह भयभीत हो गयी थी, के कैसे वो अब अपने पति का सामना करेंगी?

जब लड़के के परेशान पिता दवाखाने में आये तो उन्होंने अपने बेटे को मृत पाया और अपनी पत्नी और देखते हुए सिर्फ चार शब्द कहे।

आपको क्या लगता है कोनसे होंगे वो चार शब्द?

पति ने सिर्फ इतना ही कहा- “ Love You so much”.

उसके पति का अनअपेक्षित व्यवहार आश्चर्यचकित करने वाला था। उसका लड़का मर चूका था। वो उसे कभी वापिस नहीं ला सकता था। और वो उसकी पत्नी में भी कोई कसूर नहीं ढूंड सकता था। इसके अलावा, आगे उसने खुद ने वह बोतल उठाके बाजू में रख दी होती तो आज उसके साथ यह सब न होता।

वो किसी पर भी आरोप नहीं लगा सकता था। उसकी पत्नी ने भी उनका एकलौता बेटा खो दिया था। उस समय उसे सिर्फ अपने पति से सहानुभूति और दिलासा चाहिये थी। और यही उसके पति ने उस समय उसे दिया।

कभी-कभी हम इसी में समय व्यर्थ कर देते है की परिस्थिती के लिए कोन जिम्मेदार है ? या कोण आरोपी है ? ये सब हमारे आपसी रिश्तो में होता है। जहा जॉब करते है वहा या जिन लोगो को हम जानते है उस सभी के साथ होता है, और परिस्थिती के आवेश में आकर हम अपने रिश्तो को भूल जाते है और एक दुसरे का सहारा बनने के बजाये एक दुसरे पर आरोप लगाते है। कुछ भी हो जाये, हम उस व्यक्ति को कभी भी नहीं भूल सकते जिसे हम प्रेम करते है, इसीलिए जीवन में जो आसान है उसे प्रेम करो। आपके पास अभी जो है उसे जमा करो। और अपनी तकलीफों को विचार कर-कर के बढ़ाने के बजाये उन्हें भूल जाओ। उन सभी चीजो का सामना करो जो आपको अभी मुश्किल लगती है या जिनसे आपको डर लगता है सामना करने के बाद आप देखोंगे के वो चीजे उतनी मुश्किल नहीं है जितना की आप पहले सोच रहे थे। हमें परिस्थिती को समझकर ही लोगो के साथ व्यवहार करना चाहिये, और लोगो कठिन परिस्थितियों में उनका हमदर्द बनना चाहिये।

Heart Touching Story In Hindi- (बेटी का तौफा)

 

 तौफा

 

एक बार एक व्यक्ति की 3 साल की बेटी थी . एक दिन उस व्यक्ति ने देखा की उसकी बेटी उसके एक बहुत सुन्दर और महंगे  गोल्ड पैकिंग पेपर से एक बॉक्स को wrap कर रही थी .  यह देखकर उस व्यक्ति को बहुत गुस्सा आया  है . उसने अपनी बेटी को बहुत डांटा. तुमने मेरे इतनी costly पेपर को बेकार कर दिया वो भी बिना किसी मतलब के . तुम इसे अच्छे काम के लिए use  करती तो अच्छा लगता पर तुमने एक बेकार से डिब्बे को उसमे wrap कर दिया . कुछ दिन बीते दिवाली का दिन आया. उस व्यकि ने अपनी बेटी को गिफ्ट दिया . बेटी ने भी वही सुन्दर सा गोल्डन बॉक्स पापा को दिया .
उसके पापा पहले तो उसे देखकर बहुत खुश हुए . पर जैसे ही उन्होंने उस डिब्बे को खोल वह खाली था . यह देखकर उस व्यक्ति ने अपनी बेटी घूरा और कहा – क्या तुम्हे इतना भी नहीं पता की किसी को खाली  डिब्बा नहीं देते .
लड़की कुछ देर शांत रही फिर बोली पाप यह डिब्बा खाली नही है मैंने इसमें बहुत सारे kiss आपके लिए रखे है . कभी कभी आप जल्दी office चले जाते हैं और में सोती रह जाती हु तो आप इसमें से एक kiss ले जा सकते हैं . बेटी की बात सुनकर उस व्यक्ति की आंख भर आयी .

Heart Touching Story In Hindi (एक सैनिक की दिल को छू लेने वाली कहानी )

 

एक सैनिक की दिल को छू लेने वाली कहानी

 

ये कहानी एक सैनिक की है, जो वियतनाम में युद्ध के लिए गया था. युद्ध समाप्त होने के बाद जब उसके घर लौटने की बारी आई, तो उसने अपने माता-पिता को सैन फ्रांसिस्को से फ़ोन किया, “माँ और पिताजी! मैं घर आ रहा हूँ. लेकिन घर आने से पहले मुझे आपसे एक बात पूछनी है. मेरा एक दोस्त है, जिसे मैं अपने साथ घर लाना चाहता हूँ. क्या मैं उसे ला सकता हूँ?”

“बिल्कुल बेटा, ये भी कोई पूछने की बात है. हमें तुम्हारे दोस्त से मिलकर बहुत ख़ुशी होगी.” माता–पिता ने जवाब दिया.

“लेकिन पहले एक बात आप लोग जान लें.” सैनिक बोलता गया, “युद्ध में वह बहुत बुरी तरह घायल हो गया है. उसने एक बारूदी सुरंग पर पैर रख दिया था और उसमें उसने अपना एक हाथ और पैर गँवा दिया है. उसके पास कोई जगह नहीं है, जहाँ वो जा सके, इसलिये मैं उसे अपने साथ रहने के लिए लाना चाहता हूँ.”

उसकी यह बात सुनकर उसकी माँ बोली, “बेटा! तुम्हारे दोस्त के बारे में जानकर हमें बहुत दुःख हुआ. हो सकता है, हम उसके रहने के लिये कोई जगह तलाश कर सकें.”

“नहीं माँ! मैं चाहता हूँ कि वो हमारे साथ रहे.”

“लेकिन बेटा!” अब पिता ने कहा, “तुम समझ नहीं रहे हो कि तुम क्या चाह रहे हो? इस तरह का अपाहिज व्यक्ति हमारे लिए कितना बड़ा बोझ होगा. हमारी अपनी ज़िंदगी है, जीने के लिए और हम नहीं चाहते कि इस तरह की कोई भी परिस्थिति हमारी ज़िंदगी में दखल दे. मेरे हिसाब से तुम्हें अकेले घर आना चाहिए और अपने दोस्त को वहीँ छोड़ देना चाहिए. वह अपनी ज़िंदगी जीने के लिए कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेगा.”

सुनकर उस सैनिक ने फ़ोन रख दिया. कुछ दिनों बाद, उसके माता-पिता को सैन फ्रांसिस्को पुलिस से एक संदेश मिला. जिसमें उन्हें बताया गया कि उनके बेटे की एक बिल्डिंग से गिरकर मौत हो गई है. पुलिस के हिसाब से ये एक सुसाइड केस था.

दु:खी माता-पिता ने तुरंत ही सैन फ्रांसिस्को के लिए फ्लाइट बुक कराई और वहां पहुँच गए. वहाँ उन्हें शहर के मुर्दाघर ले जाया गया, ताकि वे अपने बेटे की पहचान कर सकें. उन्होंने उसकी पहचान कर ली, किंतु ये देखकर उनकी कंपकंपी छूट गई कि उनके बेटे का बस एक हाथ और एक पैर था.

दोस्तों, इस कहानी में जो माता-पिता हैं, वे हममें से बहुत से लोगों की तरह हैं, जो अपनी सुविधाओं को सबसे अधिक महत्व देते है. वे उन लोगों से प्यार करना या रहना या समय बिताना चाहते हैं, जो दिखने में अच्छे है, स्वस्थ हैं या फिर जिनके साथ रहकर उन्हें मज़ा आता है. वे ऐसे लोगों को पसंद नहीं करते, जो देखने में स्वस्थ, सुन्दर या स्मार्ट नहीं हैं या जिनके साथ वे मज़ा नहीं कर पाते या जो किसी भी रूप में उनके लिए असुविधाजनक हैं. वे ऐसे लोगों से दूरी बनाकर रखते है. लेकिन कभी-कभी उनके इसी व्यवहार के कारण उनके सामने ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती है, जब उन्हें पछताना पड़ता है. आइये लोगों को वे जैसे हैं, वैसे ही अपनायें और ज़रूरत पड़ने पर उनकी मदद करें.

Heart Touching Story In Hindi- ( पछतावा ) 

 

पछतावा 

 

एक मेहनती और ईमानदार नौजवान बहुत पैसे कमाना चाहता था क्योंकि वह गरीब था और बदहाली में जी रहा था। उसका सपना था कि वह मेहनत करके खूब पैसे कमाये और एक दिन अपने पैसे से एक कार खरीदे। जब भी वह कोई कार देखता तो उसे अपनी कार खरीदने का मन करता।

कुछ साल बाद उसकी अच्छी नौकरी लग गयी। उसकी शादी भी हो गयी और कुछ ही वर्षों में वह एक बेटे का पिता भी बन गया। सब कुछ ठीक चल रहा था मगर फिर भी उसे एक दुख सताता था कि उसके पास उसकी अपनी कार नहीं थी। धीरे – धीरे उसने पैसे जोड़ कर एक कार खरीद ली। कार खरीदने का उसका सपना पूरा हो चुका था और इससे वह बहुत खुश था। वह कार की बहुत अच्छी तरह देखभाल करता था और उससे शान से घूमता था।

 एक दिन रविवार को वह कार को रगड़ – रगड़ कर धो रहा था। यहां तक कि गाड़ी के टायरों को भी चमका रहा था। उसका 5 वर्षीय बेटा भी उसके साथ था। बेटा भी पिता के आगे पीछे घूम – घूम कर कार को साफ होते देख रहा था। कार धोते धोते अचानक उस आदमी ने देखा कि उसका बेटा कार के बोनट पर किसी चीज़ से खुरच – खुरच कर कुछ लिख रहा है।

यह देखते ही उसे बहुत गुस्सा आया। वह अपने बेटे को पीटने लगा। उसने उसे इतनी जो़र से पीटा कि बेटे के हाथ की एक उंगली ही टूट गयी।

दरअसल वह आदमी अपनी कार को बहुत चाहता था और वह बेटे की इस शरारत को बर्दाश्त नहीं कर सका । बाद में जब उसका गुस्सा कुछ कम हुआ तो उसने सोंचा कि जा कर देखूं कि कार में कितनी खरोंच लगी है। कार के पास जा कर देखने पर उसके होश उड़ गये। उसे खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था। वह फूट – फूट कर रोने लगा। कार पर उसके बेटे ने खुरच कर लिखा था-

Papa, I love you.

Heart Touching Story In Hindi – एक अनूठी लव स्टोरी

 

एक अनूठी लव स्टोरी

 

उस लड़के से मिलने से पहले मेरे जीवन में कुछ खोखलापन सा था, एक अजीब सा खालीपन था.जिसे आजतक मेरे अलावा किसी ने महसूस  नहीं किया था. क्योंकि मैं स्वभाव
से बहुत चंचल थी, इस कारण मैं कॉलेज और घर में लोगों से घिरी रहती थी. इसके बावजूद कि मैं
बहुत बोलती थी, मेरे जीवन का एक दूसरा पहलु भी था. और जीवन के उस हिस्से में आने की इजाजत
मैंने किसी को नहीं दी थी. बाहर से खुश दिखाई देने वाली लड़की जिसे लोग हर पल हसंते-खिलखिलाते
देखते थे, उसके बारे में ये अंदाजा तक नहीं लगाया जा सकता था कि वो अंदर से इतनी अकेली होगी,
ढेर सारे दर्द अपने भीतर समेटे हुए होगी. मैं खुश होने का दिखावा तो करती थी,
लेकिन अंदर से खुश नहीं थी. बस एक मुखौटा पहनकर जिंदगी बिताये जा रही थी.
मैंने अपने आस-पास एक घेरा सा बना लिया था.
कोई भी मेरे द्वारा बनाए गए दायरों को नहीं तोड़ सकता था.मुझे इस बात पर यकिन नहीं हो रहा था कि वो लड़का मेरे बनाए गए दायरों को तोड़कर मेरी सोच में
समाता चला जा रहा है. शुरू-शुरू में उससे बात करना महज एक औपचारिकता थी. सहपाठी होने की
वजह से मेरी और उसकी अक्सर थोड़ी-बहुत बातचीत होती रहती थी. लेकिन मुझे इस बात का आभास
तक नहीं था कि वो मुझे मन ही मन पसंद करता था, मुझसे दीवानों की तरह प्यार करता था.
ये अलग बात थी कि आज तक उसने इस बात को मेरे सामने कभी जाहिर नहीं होने दिया था.
मुझे छोटी से छोटी तकलीफ होने पर, उसे मुझसे ज्यादा दर्द होता था. कोई ऐसे भी किसी को चाह
सकता है यकीन करने में बहुत वक्त लगा. लेकिन समय के साथ मुझे इस बात का एहसास  हो गया कि
ये लड़का मेरी चिंता करता है, मेरा ख्याल रखता है. उसके प्यार में पागलपन था.
मेरी ख़ुशी के लिए वो कुछ भी कर देता था. उस लड़के ने  बिना इस बात का जिक्र किये कि
उसे मुझसे बातें करना अच्छा  लगता है, मेरे साथ वक्त बिताना अच्छा लगता है, बड़ी ही चालाकी से
मुझसे दोस्ती के लिए पूछा. उस दिन हम दोनों कॉलेज जल्दी आ गए थे और क्लास  में कोई नहीं था-
‘’ उसने पूछा क्या मैं तुम्हारा हाथ पकड़ सकता हूँ ‘’.
पहले तो मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि आज इस लड़के को क्या हो गया है ये इस तरह की बातें क्यों कर रहा है.
लेकिन मुझे उसपर पूरा  भरोसा था कि वो कोई गलत काम नहीं करेगा. उसकी आँखों में सच्चाई थी
और ये बात मैं साफ़-साफ़ देख सकती थी. उसने इतनी Honestly मेरा हाथ माँगा  कि मैं उसे मना
नहीं कर पाई और मैंने उसे अपना हाथ दे दिया. उसने मेरा हाथ अपने हाथों में लिया और कहा, क्या
तुम मेरी दोस्त बनोगी तुम मुझे अच्छी लगती हो और मैं तुममें एक अच्छा दोस्त देखता हूँ, अच्छा
इंसान देखता हूँ और मैं चाहता हूँ कि मैं जिंदगी भर तुम्हारा दोस्त बनकर तुम्हारे साथ रहूँ.’’उसने इतनी ईमानदारी से अपनी इस बात को मेरे सामने रखा कि मैं ना नहीं कर पाई और मैंने हाँ कर दिया.
उस दिन उसने बस इतना हीं कहा और चला गया. मुझसे दोस्ती करने की खुशी मैं साफ़-साफ़ उसके चेहरे पर देख सकती थी. मुझे ये सोच कर दिन भर बहुत हंसी आ रही कि किस तरह से डरते-डरते उसने मेरा हाथ पकड़ा था.
मैं अच्छी तरह से उसकी कांपती हाथों को महसूस कर सकती थी. और पूरे दिन उस वाकये को याद करके मुझे हंसी आ रही थी, मैं अकेले में भी बिना बात के हँसे जा रही थी.मेरे आस-पास रहने वाले लोग ये देख कर समझ गए थे कि जरुर कोई बात है इस लड़की को कुछ तो होने लगा है. अब हम दोनो दोस्त बन गए थे और उसने किसी भी वक्त

फोन पर बात करने की इजाजत मांग ली थी. अब उससे बात करना मुझे भी अच्छा लगने लगा
था, मेरे अंदर क्या चल रहा था मुझे समझ में नहीं आ रहा था. क्यों मैं उसके फोन का इंतज़ार
करने लगी थी ? न जाने क्यों मैं उसकी ओर खिंची चली जा रही थी ?
क्यों अब हर पल मेरा दिल उसका साथ चाहता था, न जाने क्यों मैं अब खुली आँखों से भी उसी
के सपने देखने लगी थी. क्यों मैं अब दिन-रात उसी से बातें करना चाहती थी. अब  उससे अपनी
बातें share करना मुझे अच्छा लगने लगा था. जब  भी मैं उदास होती किसी को पता चले ना
चले उसे पता चल जाता था, चाहे वह मेरे सामने हो या न हो. और वह मेरी उदासी को दूर करने
का हर संभव प्रयास करता था. मुझे खुद पर गर्व होने लगा था.एक दिन उसने मुझसे I Love You कहा, मुझे वक्त लगा… लेकिन मैंने भी अपने प्यार का इजहारकर दिया. मुझे भी अपनी जिंदगी में प्यार का इंतजार था. मैं भी प्यार को हर पल जीना चाहती थी,आगे क्या होगा इसकी चिंता न उसे थी, न मुझे. हम दोनों का सारा समय एक-दूसरे के साथ बीतने लगा.हम दोनों एक-दूसरे का साथ पाकर मानो पूरी दुनिया से कट गए थे. मैं कह सकती हूँ, उसके साथबिताये गए एक-एक पल मुझे हमेशा याद रहेंगे. मैं कितनी खूबसूरत थी, ये उसने हीं बताया था.मेरी जुल्फें उसे बहुत खूबसूरत लगती थी. मेरी कमियाँ भी उसे मेरी खूबी लगती थी. मेरे हर जन्मदिन परमुझसे ज्यादा खुश होना, मेरे ऊपर हजारों रुपए मना करने के बावजूद खर्च कर देना, वो दीवाना था मेरा.उसने भी मुझे अपना दीवाना बना लिया था. बाइक पर अक्सर घूमने निकल जाना, कॉलेज बंक करकेफिल्म देखने जाना, ये सब हमें अच्छा लगने लगा था. उसकी पूरी दुनिया बन गई थी मैं, मेरी पूजा करता था वो.मेरे लिए किसी से पंगा लेने से पहले बिल्कुल नहीं सोचता था वो. दिन तेजी से बीतने लगे, हम दोनोंदुनिया को भूल चुके थे. प्यार के उस दौर ने हम दोनों को भीतर से बदल दिया था. हमने प्यार कीढ़ेरों कसमें खाई, और ढ़ेरों वादे किए. हम दोनों प्यार के इस दौर को जी भर कर जी लेना चाहते थे.

Heart Touching Story In Hindi – पिता का सच्चा प्यार

 

पिता का सच्चा प्यार

 

दोस्तों, एक दिन एक 11 साल की लड़की ने अपने पिता से पुछा, “आप मेरे 15 वे जन्मदिन पर मुझे क्या देने वाले हो?

उस लड़की के पिता ने जवाब दिया, “बेटी, अभी तो बहुत समय बाकी है.”

जब वह लड़की 14 साल की हुई तब वह अचानक से एक दिन बेहोश हो गयी और जल्द ही उसे अस्पताल में भर्ती किया गया।
तभी डॉक्टर आये और उन्होंने बताया की उस लड़की के ह्रदय में खराबी है और वह जल्द ही मरने वाली है।

जब वह लड़की अस्पताल में पलंग पर लेटी हुई थी तभी उसने अपने पिता से कहा की, “डैडी, क्या डॉक्टर ने आपको बताया की मै मरने वाली हु?”  पिता ने रोते हुए कहा की – नहीं तुम जीने वाली हो।

लड़की ने कहा, “आपको ये कैसे पता की मैं जीने वाली हूँ?”

तभी पिता ने दरवाजे से मुह मोडते हुए कहा, “मुझे पता है.”

जब उसकी तबियत ठीक होने लगी थी तब वह 15 साल की होने वाली थी. और एक दिन वह ठीक हो गयी और अपने घर वापिस आ गयी जहा पलंग पर उसे एक पत्र मिला. जिसमे लिखा था, “मेरी प्यारी बेटी, जब तुम ये पढ़ रही होगी, तब अस्पताल में मैंने तुम्हे जो कहा था वह सच हो चूका होगा”

एक दिन तुम्हे मुझसे पूछा था की तुम्हारे 15 वे जन्मदिन पर मै तुम्हे क्या दूंगा?

तब मुझे कुछ पता नहीं था लेकिन अभी तुम्हारे लिए मेरा उपहार “मेरा दिल” है।

दोस्तों, उसके पिता ने अपने बेटी की जान के लिए अपना दिल दान किया था.

सीख-

हमेशा अपने माता-पिता से प्यार कीजिये, क्यों की हमारी ख़ुशी के लिए वे कई चीजों का त्याग करते है। जिसका हमें पता भी नहीं होता है, बहुत से समय हम जीवन में अपने आप को बड़ा बनाने में व्यस्त होते है और जिन्होंने हमें बड़ा किया उन्हें ही भूल जाते है, चाहे हम कितने की व्यस्त क्यू ना हो, अपना थोडा समय भी उनके साथ बिताये और उन्हें ये बताये के आप भी उनसे उतना ही प्यार करते है जितना वे आपसे करते थे। उन्हें आपके जीवन में उनका महत्व बताइए, उनकी सेवा कीजिये और उन्हें कभी दुःख मत दीजिये।

“अपने परिवार की खुशियों के लिए अपने जीवन को भी कुर्बान करने वाले को ही, पिता कहते है” वे अपने जीवन में अपने सुखो का त्याग कर के अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करते है।

Heart Touching Story In Hindi – एक कहानी वृद्धश्रम की

 

एक कहानी वृद्धश्रम की

 

मनुष्य अपनी इच्छाये पूर्ति करने के लिए, अपने सुख के लिए सारी हदें पार कर देता है. यह खास गुण “मनुष्य कहे जाने वाले प्राणी में होता है. यह मनुष्य इतना चालक, इतना स्वार्थी और निर्लज हो गया है की अपने जननी को भी नहीं पहचान पा रहा है. जिस पिता को ‘स्वर्ग से भी ऊँचा” कहा गया है. उन्हें घर से निकलते देर नहीं लग रही.  एक कहानी जो आपकी जीवन बदल देगी.

जो माता-पिता अपनी जवानी की कमाई, अपनी सारी-सुख सुविधा अपने चार बच्चो के पालन पोषण में लगा देते है. वही माता-पिता बूढ़े होने पर बच्चो पर बोझ हो जा रहे है. चार बच्चे मिलकर भी उनका खर्च नही उठा पाते. उनको दवा के लिए, दो वक्त के भोजन के लिए तरसना पड़ रहा है. बुढ़ापे में उनकी लाठी बनने के बजाये उनको वृद्धश्रम छोड़ देते है.

मैं उनके सामने जमीं पर बैठ गया. और भी औरते उनके आस-पास खड़ी थी. और सभी के पास ऐसी ही एक कहानी थी. उनका एक लड़का और एक लड़की थी. लड़के को पढ़ा-लिखा दिया और उसे के अच्छी सी job भी मिल गई. उसकी शादी भी धूम-धाम से हो गई. छोटी लड़की को भी पढ़-लिखा कर बढ़िया घर में शादी कर दिया. सब कुछ अच्छा चल रहा था. तभी अचानक एक दिन उनके पति की डेथ हो गया. उनके मरने के बाद से उनका समय ख़राब हो गया. घर में कोई पूछने वाला नहीं था. लड़का अपने बीवी में इतना व्यस्त हुआ की माँ का ख्याल ही खत्म हो गया. प्यार में दगा दिया मैंने.

बहु को उनका काम पसंद नहीं आता. धीरे-धीरे उनसे घृणा होने लगा. रोज घर में कलह होने लगा. उनको न घर में कुछ छूने को मिलता, न घर में कहने को. उनके लिए घर से बहार एक कोठरी दे दिया गया. यहाँ तक की बच्चो को भी छूने नहीं देती.

फिर एक दिन आया. जब उनको देखना भी ख़राब लगने लगा और उनको शहर से दूर एक महिला वृद्धश्रम में रख दिया.

उनके पास एक छोटा-सा mobile है जिसमे न तो पैसा है और न ही किसी का call आता है. बेटी कभी-कभी कर देती है.  सरकार के तरफ से 150 रूपये मिलता है. जिसे लाने जाने-आने में 50 रुपया लग जाता है. उसमे सुगर भी हो गया. उसका कहाँ से इलाज कराएँ. सरकार की भी योजनाये उनके पास नहीं पहुच पाती.

वहाँ 400-500 वृद्ध महिलाये थी जिनकी सबकी अपने एक कहानी थी. यह तो मात्र एक छोटे से राज्य की, छोटे से शहर की, छोटे से जगह की कहानी थी. इस देश में ऐसे न जाने कितनी कहानियां पड़ी है. मगर सभी के पास बस एक सवाल है – “क्या इसी दिन के लीये पाला-पोसा? 9 महीने पेट में रखा, अपनी सारी ख़ुशी लुटा दी इस दिन के लिए ?”

Heart Touching Story In Hindi – मजदूर के जूते

 

मजदूर के जूते

 

एक बार एक शिक्षक संपन्न परिवार से सम्बन्ध रखने वाले एक युवा शिष्य के साथ कहीं टहलने निकले . उन्होंने देखा की रास्ते में पुराने हो चुके एक जोड़ी जूते उतरे पड़े हैं , जो संभवतः पास के खेत में काम कर रहे गरीब मजदूर के थे जो अब अपना काम ख़त्म कर घर वापस जाने की तयारी कर रहा था .

शिष्य को मजाक सूझा उसने शिक्षक से कहा , “ गुरु जी क्यों न हम ये जूते कहीं छिपा कर झाड़ियों के पीछे छिप जाएं ; जब वो मजदूर इन्हें यहाँ नहीं पाकर घबराएगा तो बड़ा मजा आएगा !!”

शिक्षक गंभीरता से बोले , “ किसी गरीब के साथ इस तरह का भद्दा मजाक करना ठीक नहीं है . क्यों ना हम इन जूतों में कुछ सिक्के डाल दें और छिप कर देखें की इसका मजदूर पर क्या प्रभाव पड़ता है !!”

शिष्य ने ऐसा ही किया और दोनों पास की झाड़ियों में छुप गए .

मजदूर जल्द ही अपना काम ख़त्म कर जूतों की जगह पर आ गया . उसने जैसे ही एक पैर जूते में डाले उसे किसी कठोर चीज का आभास हुआ , उसने जल्दी  से जूते हाथ में लिए और देखा की अन्दर कुछ सिक्के पड़े थे , उसे बड़ा आश्चर्य हुआ और वो सिक्के हाथ में लेकर बड़े गौर से उन्हें पलट -पलट कर देखने लगा.

फिर उसने इधर -उधर देखने लगा , दूर -दूर तक कोई नज़र नहीं आया तो उसने सिक्के अपनी जेब में डाल लिए . अब उसने दूसरा जूता उठाया , उसमे भी सिक्के पड़े थे …मजदूर भावविभोर हो गया , उसकी आँखों में आंसू आ गए , उसने हाथ जोड़ ऊपर देखते हुए कहा –

 “हे भगवान् , समय पर प्राप्त इस सहायता के लिए उस अनजान सहायक का लाख -लाख धन्यवाद , उसकी सहायता और दयालुता के कारण आज मेरी बीमार पत्नी को दवा और भूखें बच्चों को रोटी मिल सकेगी.”

मजदूर की बातें सुन शिष्य की आँखें भर आयीं . शिक्षक ने शिष्य से कहा – “ क्या तुम्हारी मजाक वाली बात की अपेक्षा जूते में सिक्का डालने से तुम्हे कम ख़ुशी मिली ?”

शिष्य बोला , “ आपने आज मुझे जो पाठ पढाया है , उसे मैं जीवन भर नहीं भूलूंगा . आज मैं उन शब्दों का मतलब समझ गया हूँ जिन्हें मैं पहले कभी नहीं समझ पाया था कि लेने  की अपेक्षा देना कहीं अधिक आनंददायी है . देने का आनंद असीम है . देना देवत्त है .”

दोस्तों, सचमुच Joy of Giving से बढ़कर और कोई सुख नहीं है! हमें इस  कहानी से शिछा लेते हुए अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार ज़रूर कुछ न कुछ दान देना चाहिए और ज़रुरत मंदों की हर संभव मदद करनी चाहिए!

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