Desh Bhakti Poem in Hindi

Desh Bhakti Poem in Hindi Language

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Desh Bhakti Poem in Hindi Language

“मेरा पहलू बनो तुम और मैं आगोश हो जाऊं”

मेरा पहलू बनो तुम और मैं आगोश हो जाऊं,
दिल की हर बात कह दूं और फिर खामोश हो जााऊं।

किसी प्याले की कूव्वत ही कहाँ, बहका सकेे मुुझको..,
निगाहों से जरा हँस दो ..कि मैैं ..मदहोश हो जाऊं।

तुम्हारा रंग जो मिल जाये मुझ में… मैं भी खिल जाऊं,
पड़ो तुम धूप बन के सुबह की.. मैं ओस हो जाऊं।

परत इक धूल की जम सी गयी है मेरे दामन पर..,
अगर तुम बूंद बन जाओ तो मैं फिरदौस हो जाऊं।

स्वतंत्रता दिवस पर ‘विशेष’…

सिमट के रह गया है जज़्बा वो अब चंद लफ्जों में,
लाओ.. इक फ़ोन दो, मैं भी सरफरोश हो जाऊं..!!

Durgesh Yadav  

Durgesh Yadav

Good Night SMS in Hindi

Good Night SMS in Hindi, Good Night Shayari in Hindi for Girlfriend & Boyfriend

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रात खामोश है चाँद भी खामोश है,

पर दिल में शोर हो रहा है,

कंही ऐसा तो नहीं एक प्यारा सा दोस्त,

बीना गुड नाईट कहे सो रहा है..!!

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देर रात जब किसी की याद सताए,

ठंडी हवा जब जुल्फों को सहलाएँ,

 कर लो आँखे बंद और सो जाओ,

क्या पता जिसका है ख्याल,

वो ख्वाबों में आ जाये….!! 

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चमकते चाँद को नींद आने लगी,

आपकी खुशी से दुनिया जगमगाने लगी,

देख के आपको हर कलि गुनगुनाने लगी,

अब तो फेंकते फेंकते मुझे भी नींद आने लगी …!!

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हो चुकी रात अब सो भी जाइए

जो हैं दिल के करीब उनके ख्यालों में खो जाइए 

कर रहा होगा कोई इंतज़ार आपका 

ख़्वाबों में ही सही उनसे मिल तो आइये ..!!

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रात को चाँद निकल आया है,

संग अपने तारों की बारात लाया है,

प्यार से देखो आसमान को,

वो मेरी ओर से आपको गुड नाईट कहने आये है..!!

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सुभ हो रात्रि आपकी,

बड़ी ही मीठी नींद  हो आपकी,

आये आपको कोई प्यारा सा ख्वाब,

और ख्वाब की हर ख्वाहिस पूरी हो आपकी…!!

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हम अपनों से खफ़ा हो नहीं सकते,

प्यार के रिश्ते बेवफा हो नहीं सकते,

तुम हमें भुला कर भले ही सो जाओ,

हम तुम्हे याद किये बिना सो नहीं सकते ..!!

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बड़ी ख़ामोशी सी छायी है,

लगता है नींद आपको आयी है,

चलो अब सो जाओ आँखे बंद करके,

देखो कितनी प्यारी रात आयी है…!! 

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प्यारी  निंदिया भेजी है आपको,

आँखों तक आये तो बता देना,

वरना सो जाना प्यारी सी नींद के साथ,

और ख्वाबों में हमें बुला लेना…!!

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आकाश के तारों में खोया है जहाँ सारा,

लगता है प्यारा एक एक तारा,

उन तारो में सबसे प्यारा है एक सितारा,

जो इस टाइम पढ़ रहा है मैसेज हमारा…!!

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Raksha Bandhan Poem in Hindi

Raksha Bandhan Poem in Hindi

प्यारे भैया आपके लिए  राखी मँगवाकर रखी हूँ 

Raksha Bandhan Poem

प्यारे भैया, दो पल को ही मेरे घर तुम आ जाना,
माँ बाबा का हाल है कैसा, आकर जरा बता जाना,
आँगन मेरा महक उठेगा, मायके की मिट्टी पाकर,
घर मेँ माँ बाबा को सुनाना, मेरी ये चिट्ठी जाकर…!!

आओगे जब मिलने मुझसे, माँ का संदेशा ले आना,
बाबा का दुलार भी मुझको, आकर तुम ही दे जाना,
भैया मैँने प्यारी सी एक, राखी मँगवाकर रखी है,
अब के बरस तुम आओगे, ये आस लगाकर रखी है…!!

प्यारे भैया, पता है मुझको काम बहुत ही ज्यादा है,
लेकिन राखी पर आने का, मुझसे भी किया इक वादा है,
अब के बरस भी पलकेँ बिछाए, बाट तुम्हारी देखूंगी,
हाथोँ मेँ इक थाल सजाए, दरवाजे पर बैठूंगी…!!

वादा करो कि अबकी बार, राखी पर तुम आओगे,
साथ मेँ अपने मेरी प्यारी, भाभी को भी लाओगे,
धन दौलत की चाह नहीँ है, न हीरे जवाहरात की,
आँखेँ मेरी प्यासी हैँ, बस तुमसे मुलाकात की…!!

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सबसे प्यारे भैया मेरे

अच्छे भैया मेरे सबसे प्यारे भैया मेरे
तुम हो मेरे रखवाले मुझसे ये राखी बन्धवाले
तेरे साथ मैं चलूँगी मेरे साथ तुम चलना
तेरी रक्षा मैं करुगी मेरी रक्षा तुम करना,

राखी का ये बंधन प्यारा इस बंधन को बांधे रखना
टूटे ना रिश्तो का धागा मजबूत अपने इरादे रखना
जब मैं तुमसे रूठ जाऊं तो तुम मुझे मनाना
जब-जब मैं रोऊँ तुम मुझे हंसाना,

मेरे भैया दूर ना जाना मुझसे तुम राखी बंधवाना
प्यारे प्यारे भैया मेरे सबसे अच्छे भैया मेरे…!!

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Rahat Indori Shayari in Hindi

Rahat Indori Shayari in Hindi

This Poem has 10 poems of Dr. Rahat Indori. Amazing collection of Rahat Indori Shayari in Hindi language.

Rahat Indori Shayari in Hindi

1- कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया

कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया
इस पार के थपेड़ों ने उस पार कर दिया,

अफवाह थी की मेरी तबियत ख़राब हैं
लोगो ने पूछ पूछ के बीमार कर दिया,

रातों को चांदनी के भरोसें ना छोड़ना
सूरज ने जुगनुओं को ख़बरदार कर दिया,

रुक रुक के लोग देख रहे है मेरी तरफ
तुमने ज़रा सी बात को अखबार कर दिया,

इस बार एक और भी दीवार गिर गयी
बारिश ने मेरे घर को हवादार कर दिया,

बोल था सच तो ज़हर पिलाया गया मुझे
अच्छाइयों ने मुझे गुनहगार कर दिया,

दो गज सही ये मेरी मिलकियत तो हैं
ऐ मौत तूने मुझे ज़मीदार कर दिया…. !!

-Dr. Rahat Indori

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2- सफ़र की हद है वहां तक की कुछ निशान रहे

सफ़र की हद है वहां तक की कुछ निशान रहे
चले चलो की जहाँ तक ये आसमान  रहे,

ये क्या उठाये कदम और आ गयी मंजिल
मज़ा तो तब है के पैरों में कुछ थकान रहे,

वो शख्स मुझ को कोई जालसाज़ लगता हैं
तुम उसको दोस्त समझते हो फिर भी ध्यान रहे,

मुझे ज़मीं की गहराइयों ने दबा लिया
मैं चाहता था मेरे सर पे आसमान रहे,

अब अपने बिच मरासिम नहीं अदावत है
मगर ये बात हमारे ही दरमियाँ रहे,

सितारों की फसलें उगा ना सका कोई
मेरी ज़मीं पे कितने ही आसमान रहे,

वो एक सवाल है फिर उसका सामना होगा
दुआ करो की सलामत मेरी ज़बान रहे…!!

-Dr. Rahat Indori

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3- बुलाती है मगर जाने का नईं

बुलाती है मगर जाने का नईं 
ये दुनिया है इधर जाने का नईं,

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुजर जाने का नईं,

सितारें नोच कर ले जाऊँगा
में खाली हाथ घर जाने का  नईं,

वबा फैली हुई है हर तरफ
अभी माहौल मर जाने का नईं,

वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर जालिम से डर जाने का नईं,

नईं – नईं का मतलब पुरानी उर्दू में नहीं होता है
वबा  – महामारी…!!

-Dr. Rahat Indori

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Rahat Indori Shayari in Hindi

4- अंदर का ज़हर चूम लिया, धूल के आ गए

अंदर का ज़हर चूम लिया, धूल के आ गए
कितने शरीफ लोग थे सब खुल के आ गए,

सूरज से जंग जीतने निकले थे बेवकूफ
सारे सिपाही माँ के थे घुल के आ गए,

मस्जिद में दूर दूर कोई दुसरा न था
हम आज अपने आप से मिल जुल के आ गये,

नींदो से जंग होती रहेगी तमाम उम्र
आँखों में बंद ख्वाब अगर खुल के आ गए,

सूरज ने अपनी शक्ल भी देखि थी पहली बार
आईने को मजे भी मुक़ाबिल के आ गए,

अनजाने साये फिरने लगे हैं इधर उधर
मौसम हमरे शहर में काबुल के आ गये..!!

-Dr. Rahat Indori

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5- समन्दरों में मुआफिक हवा चलाता है

समन्दरों में मुआफिक हवा चलाता है
जहाज़ खुद नहीं चलते खुदा चलाता है,

ये जा के मील के पत्थर पे कोई लिख आये
वो हम नहीं हैं, जिन्हें रास्ता चलाता है,

वो पाँच वक़्त नज़र आता है नमाजों में
मगर सुना है कि शब को जुआ चलाता है,

ये लोग पांव नहीं जेहन से अपाहिज हैं
उधर चलेंगे जिधर रहनुमा चलाता है,

हम अपने बूढे चिरागों पे खूब इतराए
और उसको भूल गए जो हवा चलाता है..!!

-Dr. Rahat Indori

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Rahat Indori Shayari

6- इन्तेज़ामात  नए सिरे से संभाले जाएँ

इन्तेज़ामात  नए सिरे से संभाले जाएँ
जितने कमजर्फ हैं महफ़िल से निकाले जाएँ,

मेरा घर आग की लपटों में छुपा हैं लेकिन
जब मज़ा हैं तेरे आँगन में उजाला जाएँ,

गम सलामत हैं तो पीते ही रहेंगे लेकिन
पहले मयखाने की हालात तो संभाली जाए,

खाली वक्तों में कहीं बैठ के रोलें यारों
फुरसतें हैं तो समंदर ही खंगाले जाए,

खाक में यु ना मिला ज़ब्त की तौहीन ना कर
ये वो आसूं हैं जो दुनिया को बहा ले जाएँ,

हम भी प्यासे हैं ये अहसास तो हो साकी को
खाली शीशे ही हवाओं में उछाले जाए,

आओ शहर में नए दोस्त बनाएं “राहत”
आस्तीनों में चलो साँप ही पाले जाए..!!

-Dr. Rahat Indori

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Rahat Indori Shayari in Hindi

7- दोस्ती जब किसी से की जाये

दोस्ती जब किसी से की जाये
दुश्मनों की भी राय ली जाए,

मौत का ज़हर हैं फिजाओं में
अब कहा जा के सांस ली जाए,

बस इसी सोच में हु डूबा हुआ
ये नदी कैसे पार की जाए,

मेरे माजी के ज़ख्म भरने लगे
आज फिर कोई भूल की जाए,

बोतलें खोल के तो पि बरसों
आज दिल खोल के पि जाए..!!

-Dr. Rahat Indori

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8- लोग हर मोड़ पर रुक – रुक के संभलते क्यों है ?

लोग हर मोड़ पर रुक – रुक के संभलते क्यों है
इतना डरते है तो फिर घर से निकलते क्यों है,

मैं ना जुगनू हूँ दिया हूँ ना  कोई तारा हूँ
रौशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं,

नींद से मेरा ताल्लुक ही नहीं बरसों से
ख्वाब आ – आ के मेरी छत पे टहलते क्यों हैं,

मोड़ तो होता हैं जवानी का संभलने के लिये
और सब लोग यही आकर फिसलते क्यों हैं..??

-Dr. Rahat Indori

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9- रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं

रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं
चाँद पागल हैं अंधेरे में निकल पड़ता हैं,

मैं समंदर हूँ कुल्हाड़ी से नहीं कट सकता
कोई फव्वारा नही हूँ जो उबल पड़ता हैं,

कल वहाँ चाँद उगा करते थे हर आहट पर
अपने रास्ते में जो वीरान महल पड़ता हैं,

ना त-आरूफ़ ना त-अल्लुक हैं  मगर दिल अक्सर
नाम सुनता हैं  तुम्हारा तो उछल पड़ता हैं,

उसकी याद आई है  साँसों ज़रा धीरे चलो
धड़कनो से भी इबादत में खलल पड़ता हैं…!!

-Dr. Rahat Indori

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10- सारी बस्ती क़दमों में है, ये भी इक फ़नकारी है

सारी बस्ती क़दमों में है, ये भी इक फ़नकारी है
वरना बदन को छोड़ के अपना जो कुछ है सरकारी है,

कालेज के सब लड़के चुप हैं काग़ज़ की इक नाव लिये
चारों तरफ़ दरिया की सूरत फैली हुई बेकारी है,

फूलों की ख़ुश्बू लूटी है, तितली के पर नोचे हैं
ये रहजन का काम नहीं है, रहबर की मक़्क़ारीहै,

हमने दो सौ साल से घर में तोते पाल के रखे हैं
मीर तक़ी के शेर सुनाना कौन बड़ी फ़नकारी है,

अब फिरते हैं हम रिश्तों के रंग-बिरंगे ज़ख्म लिये
सबसे हँस कर मिलना-जुलना बहुत बड़ी बीमारी है,

दौलत बाज़ू हिकमत गेसू शोहरत माथा गीबत होंठ
इस औरत से बच कर रहना, ये औरत बाज़ारी है,

कश्ती पर आँच आ जाये तो हाथ कलम करवा देना
लाओ मुझे पतवारें दे दो, मेरी ज़िम्मेदारी है…!!

-Dr. Rahat Indori

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Rahat Indori Shayari in Hindi

 

Kumar Vishwas Poem in Hindi

Motivational Poems in Hindi

Motivational Poems in Hindi

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Hindi Kavita on Life

कोई आपके लिए रूपये खर्च करेगा तो कोई,
समय खर्च करेगा, समय खर्च करने वाले,
व्यक्ति को हमेशा अधिक महत्व और सम्मान देना क्योंकि,
वह आपके पीछे अपने जीवन के वो पल खर्च,
कर रहा है जो उसे कभी वापिस नही मिलेंगे…!!

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रख हौसला वो मंजर भी आयेगा,
प्यासे के पास चल के समन्दर भी आयेगा,
थक कर न बैठ ऐ मंजिल के मुसाफिर,
मंजिल भी मिलेगी…
और मिलने का मज़ा भी आयेगा..!!

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माना दुनियाँ बुरी है सब जगह धोखा है,
लेकिन हम तो अच्छे बने हमें किसने रोका है.
रिश्तो की सिलाई अगर भावनाओ से हुई है
तो टूटना मुश्किल है..
और अगर स्वार्थ से हुई है,
तो टिकना मुश्किल है..!!

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न मैं गिराऔर न मेरी उम्मीदों के मीनार गिरे..!
पर.. लोग मुझे गिराने मे कई बार गिरे…!!”
सवाल जहर का नहीं था वो तो मैं पी गया,
तकलीफ लोगों को तब हुई, जब मैं जी गया.
डाली पर बैठे हुए परिंदे को पता है कि डाली कमज़ोर है ..
फिर भी वो उस डाली पर बैठता है क़्योकीउसको डाली से ज़यादा अपने पंख पर भरोसा है. “…..!!

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अगर इंसान शिक्षा के पहले संस्कार
व्यापार से पहले व्यवहार
भगवान से पहले माता पिता को पहचान ले तो
जिन्दगी में कभी कोई कठिनाई नहीं आयेगी..!!

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सुकून उतना ही देना,  प्रभु जितने से जिंदगी चल जाए,
औकात बस इतनी देना, कि, औरों  का भला हो जाए,
रिश्तो में गहराई इतनी हो, कि, प्यार से निभ जाए,
आँखों में शर्म इतनी देना, कि, बुजुर्गों का मान रख पायें,
साँसे पिंजर में इतनी हों, कि, बस नेक काम कर जाएँ,
बाकी उम्र ले लेना, कि, औरों पर बोझ न बन जाए..!!

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मेहनत सीढियों की तरह होती हैं,
“और”
भाग्य लिफ्ट की तरह
किसी समय लिफ्ट तो बंद हो सकती हैं,
“लेकिन”
सीढियाँ हमेशा उँचाई की तरफ ले जाती है..!!

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वक्त से लड़कर जो नसीब बदल दे,
इन्सान वही जो अपनी तक़दीर बदल दे,
कल क्या होगा कभी मत सोचो,
क्या पता कल वक्त खुद अपनी तस्वीर बदल दे…!!

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इच्छाएँ, सपने, उम्मीदें और नाखून,
इन्हें समय- समय पर काटते रहें,
अन्यथा ये दुखः का कारण बनते हैं……!!

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आंखे कितनी भी छोटी क्यो ना हो !!
ताकत तो उसमे सारा आसमान देखने
की होती है ज़िन्दगी एक हसीन
ख़्वाब है जिसमें जीने
की चाहत होनी चाहिये ग़म खुद ही ख़ुशी
में बदल जायेंगे सिर्फ मुस्कुराने कीआदत
होनी चाहिये..!!

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विकल्प मिलेंगे बहुत, मार्ग भटकानेके लिए,

संकल्प एक ही काफ़ी है, मंज़िल तक जाने के लिए…!!

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Motivational Poems in Hindi

Harivansh Rai Bachchan Ki Kavitayen

Harivansh Rai Bachchan Ki Kavitayen

Harivansh Rai Bachchan Ki Kavitayen ab hindi me. Yaha par unki kuch rachnaye di hui hai.

**** हरिबंश राय बच्चन जी की “अग्निपथ” कबिता ****

Harivansh Rai Bachchan Ki rachna agnipath

 

वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने हों बड़े,
एक पत्र छाँह भी,
माँग मत, माँग मत, माँग मत,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ !

तू न थकेगा कभी,
तू न रुकेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ !

यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रु श्वेत रक्त से,
लथपथ लथपथ लथपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ !!

– हरिवंश राय बच्चन 

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**** हरिबंश राय बच्चन जी की “रोक न पाया मैं आँसू “- कबिता ****

Harivansh Rai Bachchan Ki Kavitayen hindi me

जिसके पीछे पागल हो कर, मैं दौड़ा अपने जीवन भर,
जब मृगजल में परिवर्तित हो, मुझ पर मेरा अरमान हँसा!
तब रोक न पाया मैं आँसू… !!

जिसमें अपने प्राणों को भर, कर देना चाहा अजर–अमर,
जब विस्मृति के पीछे छिपकर, मुझ पर वह मेरा गान हँसा!
तब रोक न पाया मैं आँसू… !!

मेरे पूजन आराधन को, मेरे संपूर्ण समर्पण को,
जब मेरी कमज़ोरी कहकर, मुझ पर मेरा पाषाण हँसा!
तब रोक न पाया मैं आँसू… !!

– हरिवंश राय बच्चन

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**** हरिबंश राय बच्चन जी की “मैं कल रात नहीं रोया था” – कबिता ****

 

मैं कल रात नहीं रोया था,
दुख सब जीवन के विस्मृत कर,
तेरे वक्षस्थल पर सिर धर,
तेरी गोदी में चिड़िया के बच्चे-सा छिपकर सोया था,
मैं कल रात नहीं रोया था..!

प्यार-भरे उपवन में घूमा,
फल खाए, फूलों को चूमा,
कल दुर्दिन का भार न अपने पंखो पर मैंने ढोया था,
मैं कल रात नहीं रोया था..!

आँसू के दाने बरसाकर,
किन आँखो ने तेरे उर पर,
ऐसे सपनों के मधुवन का मधुमय बीज, बता, बोया था?
मैं कल रात नहीं रोया था..!!

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**** हरिबंश राय बच्चन जी की “क्या भूलूं, क्या याद करूं मैं” – कबिता ****

 

अगणित उन्मादों के क्षण हैं,
अगणित अवसादों के क्षण हैं,
रजनी की सूनी की घडियों को किन-किन से आबाद करूं मैं,
क्या भूलूं, क्या याद करूं मैं..!

याद सुखों की आसूं लाती,
दुख की, दिल भारी कर जाती,
दोष किसे दूं जब अपने से, अपने दिन बर्बाद करूं मैं,
क्या भूलूं, क्या याद करूं मैं..!

दोनो करके पछताता हूं,
सोच नहीं, पर मैं पाता हूं,
सुधियों के बंधन से कैसे अपने को आबाद करूं मैं,
क्या भूलूं, क्या याद करूं मैं..!!

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Madhushala Poem in Hindi by Harivansh Rai Bachchan

Maa poem in Hindi

This poem is a really amazing maa poem in Hindi.

Amazing Poem – Maa Poem in Hindi

जब आँख खुली तो अम्‍मा की गोदी का एक सहारा था,
उसका नन्‍हा सा आँचल मुझे भूमण्‍डल से प्‍यारा था..!

उसके चेहरे की झलक देख चेहरा फूलों सा खिलता हैं,
उसके स्‍तन की एक बूंद से मुझको जीवन मिलता हैं..!

हाथों से बालों को नोचा, पैरों से खूब प्रहार किया,
फिर भी उस माँ ने पुचकारा हमको जी भर के प्‍यार किया..!

मैं उसका राजा बेटा हूँ वो आँख का तारा कहती हैं,
मैं बनूँ बुढ़ापे में उसका बस एक सहारा कहती हैं..!

उंगली को पकड़ चलाया था पढ़ने विद्यालय भेजा था,
मेरी नादानी को भी निज अन्‍तर में सदा सहेजा था..!

मेरे सारे प्रश्‍नों का वो फौरन जवाब बन जाती हैं,
मेरी राहों के काँटे चुन वो ख़ुद ग़ुलाब बन जाती हैं..!

माँ ही हैं जो ख़ुद भूखी रह करके हमें खिलाती थी,
हमको सूखा बिस्‍तर देकर ख़ुद गीले में सो जाती थी..!

माँ ही हैं जिसने होठों को भाषा सिखलाई थी,
मेरी नींदों के लिए रात भर उसने लोरी गाई थी..!

माँ ही हैं जिसने हर ग़लती पर डाँटा समझाया था,
बच जाऊँ बुरी नज़र से काला टीका सदा लगाया था..!

माँ की ममता को देख मौत भी आगेसे हट जाती है,
गर माँ अपमानित होती, धरती की छाती फट जाती है..!

घर को पूरा जीवन देकर बेचारी माँ क्‍या पाती है,
रूखा सूखा खा लेती है, पानी पीकर सो जाती है..!

जो माँ जैसी देवी घर के मंदिर में नहीं रख सकते हैं,
वो लाखों पुण्‍य भले कर लें इंसान नहीं बन सकते हैं..!

माँ जिसको भी जल दे दे वो पौधा संदल बन जाता है,
माँ के चरणों को छूकर पानी गंगाजल बन जाता है..!

माँ के आँचल ने युगों-युगों से भगवानों को पाला है,
माँ के चरणों में जन्नत है गिरिजाघर और शिवाला है..!

हिमगिरि जैसी ऊँचाई है, सागर जैसी गहराई है,
दुनिया में जितनी ख़ुशबू है माँ के आँचल से आई है..!

माँ कबिरा की साखी जैसी, माँ तुलसी की चौपाई है,
मीराबाई की पदावली ख़ुसरो की अमर रुबाई है..!

माँ आंगन की तुलसी जैसी पावन बरगद की छाया है,
माँ वेद ऋचाओं की गरिमा, माँ महाकाव्‍य की काया है..!

माँ मानसरोवर ममता का, माँ गोमुख की ऊँचाई है,
माँ परिवारों का संगम है, माँ रिश्‍तों की गहराई है..!

माँ हरी दूब है धरती की, माँ केसर वाली क्‍यारी है,
माँ की उपमा केवल माँ है, माँ हर घर की फुलवारी है..!

सातों सुर नर्तन करते जब कोई माँ लोरी गाती है,
माँ जिस रोटी को छू लेती है वो प्रसाद बन जाती है..!

माँ हँसती है तो धरती का ज़र्रा-ज़र्रा मुस्‍काता है,
देखो तो दूर क्षितिज अंबर धरती को शीश झुकाता है..!

माना मेरे घर की दीवारों में चन्‍दा-सी मूरत है,
पर मेरे मन के मंदिर में बस केवल माँ की मूरत है..!

माँ सरस्‍वती, लक्ष्‍मी, दुर्गा, अनुसूया, मरियम, सीता है,
माँ पावनता में रामचरितमानस्, भगवद्गीता है..!

अम्‍मा तेरी हर बात मुझे वरदान से बढ़कर लगती है,
हे माँ तेरी सूरत मुझको भगवानसे बढ़कर लगती है..!

सारे तीरथ के पुण्‍य जहाँ, मैं उन चरणों में लेटा हूँ,
जिनके कोई सन्‍तान नहीं, मैं उन माँओं का बेटा हूँ..!

हर घर में माँ की पूजा हो ऐसा संकल्‍प उठाता हूँ,
मैं दुनिया की हर माँ के चरणों में ये शीश झुकाता हूँ..!!

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Poem on Father in Hindi

 

Best poem on father in Hindi language. All poem is dedicated to all father in the world.

Best Poem on Father in Hindi for dedicated fathers

 

कविता 1-  !! – वो थे पापा – !!

जब माँ डाँट रहीं थी तो, कोई चुपके से हँसा रहा था,
वो थे पापा,

जब मैं सो रहा था तब कोई चुपके से सिर को सहला रहा था ,
वो थे पापा,

जब मैं सुबह उठा तो कोई बहुत थक कर भी काम पर जा रहा था ,
वो थे पापा,

खुद कड़ी धूप में रह कर कोई मुझे ए.सी. में सुला रहा था,
वो थे पापा,

सपने तो मेरे थे पर उन्हें पूरा करने का रास्ता कोई और बताऐ जा रहा था ,
वो थे पापा,

मैं तो सिर्फ अपनी खुशियों में हँसता हूँ,
पर मेरी हँसी देख कर कोई अपने गम भुलाऐ जा रहा था ,
वो थे पापा,

फल खाने की ज्यादा जरूरत तो उन्हें थी,
पर कोई मुझे सेब खिलाए जा रहा था ,
वो थे पापा,

खुश तो मुझे होना चाहिए कि वो मुझे मिले ,
पर मेरे जन्म लेने की खुशी कोई और मनाए जा रहा था ,
वो थे पापा,

ये दुनिया पैसों से चलती है पर कोई सिर्फ मेरे लिए पैसे कमाए जा रहा था ,
वो थे पापा,

घर में सब अपना प्यार दिखाते हैं पर कोई बिना दिखाऐ भी इतना प्यार किए जा रहा था ,
वो थे पापा,

पेड़ तो अपना फल खा नही सकते इसलिए हमें देते हैं…
पर कोई अपना पेट खाली रखकर भी मेरा पेट भरे जा रहा था ,
वो थे पापा,

मैं तो नौकरी के लिए घर से बाहर जाने पर दुखी था
पर मुझसे भी अधिक आंसू कोई और बहाए जा रहा था ,
वो थे पापा,

मैं अपने “बेटा” शब्द को सार्थक बना सका या नही..
पता नहीं… पर कोई बिना स्वार्थ के अपने “पिता” शब्द को
सार्थक बनाए जा रहा था ,
वो थे पापा…!!

 

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कविता 2- !!- माँ घर का गौरव तो पिता घर का अस्तितव -!!

 

माँ घर का गौरव तो पिता घर का अस्तितव होते हैं,
माँ के पास अश्रुधारा तो पिता के पास संयम होता है..!

दोनो समय का भोजन माँ बनाती है,
तो जीवन भर भोजन की व्यवस्था करने वाले पिता होते हैं..!

कभी चोट लगे तो मुंह से ‘माँ ’ शब्द निकलता है
रास्ता पार करते वक़्त कोई ट्रक पास आकर ब्रेक लगाये तो ‘ बाप रे ’ ही निकलता है.

क्यूं कि छोटे छोटे संकट के लिये माँ याद आती है,
मगर बड़े संकट के वक़्त पिता याद आते हैं..!

पिता एक वट वृक्ष है जिसकी शीतल छाव मे,
सम्पूर्ण परिवार सुख से रहता है…!!!!

 

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father poem in hindi

कविता 3 – !!- पापा आप बहुत याद आते हैं -!!

 

जिन्दगी तो मेरी कट रही है आपके बाद भी,
मगर आप के बिन जीने में वो बात नहीं…!

उपर से तो सब मेरे अपने ही अपने है,
मगर आप की तरह अन्दर से कोई मेरे साथ नही…!

ख्याल सब रखते है मेरा अपने तरीके से अच्छी तरह,
मगर आपसे जिद करने का मजा अब आता नहीं…!

लडाईयां तो अब भी होती है घर में हमारे,
मगर आपसे वो मीठा मीठा लडने का मजा कोई दे पाता नहीं…!

मै आज भी शाम को दरवाजे पे नजरें टिकाये रहता हूं,
आयेंगे अभी कुछ ले के मै अपने से दिल से बार बार कहता हूं…! 

मगर जब देखता हूं आस-पास आप नहीं होते,
तब सच मानिये आपके ये बच्चे छिप छिप के अकेले में है बहुत रोते हैं..!

भूल थी अगर मेरी तो एक दफा कहते मुझसे,
ऐसे अकेला छोड जाना कोई अच्छी बात नहीं…..!!

 

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सोहनलाल द्विवेदी की कविताएं

सोहनलाल द्विवेदी की कविताएं

सोहनलाल द्विवेदी जी कुछ चुनी हुई कविताएं।

Sohanlal Dwiwedi

कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है

मन का विश्वास रगों में साहस भरता है
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है

आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है

मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में

मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो

जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम

कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती..!!

 — सोहनलाल द्विवेदी 

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बढे़ चलो, बढे़ चलो

न हाथ एक शस्त्र हो,
न हाथ एक अस्त्र हो,
न अन्न वीर वस्त्र हो,
हटो नहीं, डरो नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो..!!

रहे समक्ष हिम-शिखर,
तुम्हारा प्रण उठे निखर,
भले ही जाए जन बिखर,
रुको नहीं, झुको नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो..!!

घटा घिरी अटूट हो,
अधर में कालकूट हो,
वही सुधा का घूंट हो,
जिये चलो, मरे चलो, बढ़े चलो, बढ़े चलो..!!

गगन उगलता आग हो,
छिड़ा मरण का राग हो,
लहू का अपने फाग हो,
अड़ो वहीं, गड़ो वहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो..!!

चलो नई मिसाल हो,
जलो नई मिसाल हो,
बढो़ नया कमाल हो,
झुको नही, रूको नही, बढ़े चलो, बढ़े चलो..!!

अशेष रक्त तोल दो,
स्वतंत्रता का मोल दो,
कड़ी युगों की खोल दो,
डरो नही, मरो नहीं, बढ़े चलो, बढ़े चलो..!!

 — सोहनलाल द्विवेदी 

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मातृभूमि

ऊँचा खड़ा हिमालय
आकाश चूमता है,
नीचे चरण तले झुक,
नित सिंधु झूमता है..!!

गंगा यमुन त्रिवेणी
नदियाँ लहर रही हैं,
जगमग छटा निराली
पग पग छहर रही है..!!

वह पुण्य भूमि मेरी
वह स्वर्ण भूमि मेरी,
वह जन्मभूमि मेरी
वह मातृभूमि मेरी ..!!

झरने अनेक झरते
जिसकी पहाड़ियों में,
चिड़ियाँ चहक रही हैं,
हो मस्त झाड़ियों में..!!

अमराइयाँ घनी हैं
कोयल पुकारती है,
बहती मलय पवन है,
तन मन सँवारती है..!!

वह धर्मभूमि मेरी,
वह कर्मभूमि मेरी,
वह जन्मभूमि मेरी
वह मातृभूमि मेरी ..!!

जन्मे जहाँ थे रघुपति,
जन्मी जहाँ थी सीता,
श्रीकृष्ण ने सुनाई,
वंशी पुनीत गीता ..!!

गौतम ने जन्म लेकर,
जिसका सुयश बढ़ाया,
जग को दया सिखाई,
जग को दिया दिखाया ..!!

वह युद्ध–भूमि मेरी,
वह बुद्ध–भूमि मेरी,
वह मातृभूमि मेरी,
वह जन्मभूमि मेरी ..!!

— सोहनलाल द्विवेदी 

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ओस

हरी घास पर बिखेर दी हैं
ये किसने मोती की लड़ियाँ?
कौन रात में गूँथ गया है
ये उज्‍ज्‍वल हीरों की करियाँ?

जुगनू से जगमग जगमग ये
कौन चमकते हैं यों चमचम?
नभ के नन्‍हें तारों से ये
कौन दमकते हैं यों दमदम?

लुटा गया है कौन जौहरी
अपने घर का भरा खजा़ना?
पत्‍तों पर, फूलों पर, पगपग
बिखरे हुए रतन हैं नाना।

बड़े सवेरे मना रहा है
कौन खुशी में यह दीवाली?
वन उपवन में जला दी है
किसने दीपावली निराली?

जी होता, इन ओस कणों को
अंजली में भर घर ले आऊँ?
इनकी शोभा निरख निरख कर
इन पर कविता एक बनाऊँ..!!

— सोहनलाल द्विवेदी 

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जी होता चिड़िया बन जाऊँ

जी होता, चिड़िया बन जाऊँ,
मैं नभ में उड़कर सुख पाऊँ,

मैं फुदक-फुदककर डाली पर,
डोलूँ तरु की हरियाली पर,
फिर कुतर-कुतरकर फल खाऊँ,
जी होता चिड़िया बन जाऊँ,

कितना अच्छा इनका जीवन?
आज़ाद सदा इनका तन-मन,
मैं भी इन-सा गाना गाऊँ,
जी होता, चिड़िया बन जाऊँ,

जंगल-जंगल में उड़ विचरूँ,
पर्वत घाटी की सैर करूँ,
सब जग को देखूँ इठलाऊँ,
जी होता चिड़िया बन जाऊँ,

कितना स्वतंत्र इनका जीवन?
इनको न कहीं कोई बंधन,
मैं भी इनका जीवन पाऊँ,
जी होता चिड़िया बन जाऊँ..!!

— सोहनलाल द्विवेदी 

Poem in Hindi Language

Amazing Collection of Poem in Hindi Language, Short Poem in Hindi Language

Kavita in Hindi

 

1- घर जाता हूँ तो मेरा ही बैग मुझे चिढ़ाता है,

 

घर जाता हूँ तो मेरा ही बैग मुझे चिढ़ाता है,
मेहमान हूँ अब ,ये पल पल मुझे बताता है …

माँ कहती है, सामान बैग में फ़ौरन डालो,
हर बार तुम्हारा कुछ ना कुछ छुट जाता है…

घर पंहुचने से पहले ही लौटने की टिकट,
वक़्त परिंदे सा उड़ता जाता है…

उंगलियों पे लेकर जाता हूं गिनती के दिन,
फिसलते हुए जाने का दिन पास आता है…

अब कब होगा आना सबका पूछना ,
ये उदास सवाल भीतर तक बिखराता है…

घर से दरवाजे से निकलने तक ,
बैग में कुछ न कुछ भरते जाता हूँ …

जिस घर की सीढ़ियां भी मुझे पहचानती थी ,
घर के कमरे की चप्पे चप्पे में बसता था मैं ,
लाइट्स ,फैन के स्विच भूल हाथ डगमगाता है…

पास पड़ोस जहाँ बच्चा बच्चा था वाकिफ ,
बड़े बुजुर्ग बेटा कब आया पूछने चले आते हैं…

कब तक रहोगे पूछ अनजाने में वो,
घाव एक और गहरा कर जाते हैं…

ट्रेन में माँ के हाथों की बनी रोटियां,
डबडबाई आँखों में आकर डगमगाता है…

लौटते वक़्त वजनी हो गया बैग,
सीट के नीचे पड़ा खुद उदास हो जाता है…

तू एक मेहमान है अब ये पल पल मुझे बताता है…
मेरा घर मुझे वाकई बहुत याद आता है….!!

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अरविन्द कुमार पाल ‘श्रीद ‘ की रचनाएँ

1- जिंदगी यदि सफर मन का है , तो मुस्कुराना होगा,

जिंदगी के रंग तो बहुत हैं , पर एक रंग को पहचानना होगा ,

चाहत है जिस रंग की उस रंग के लिए मुस्कुराना होगा…!!

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2- आइना में सूरत क्या देंखू

दिल की आइना में, खुद को क्या देखूँ ,

बहुत खाई है जीवन में , राहों में खाई क्या देखूँ,

अलग कर लू खुद को खाई से ,

मन की गहराई को क्या देखूँ,

दिल ही है जो मन की गहराई को छू सके,

आँखे ही है जो सुंदरता को ले सके ,

कोई नहीं है ऐसा जो दिल को हरा सके,

सुनो दिल की बात न की मन की खाई से,

जित लो दुनिया को दिल की लड़ाई से..!!

3 –