Poem in Hindi Language

Amazing Collection of Poem in Hindi Language, Short Poem in Hindi Language

Kavita in Hindi

 

1- घर जाता हूँ तो मेरा ही बैग मुझे चिढ़ाता है,

 

घर जाता हूँ तो मेरा ही बैग मुझे चिढ़ाता है,
मेहमान हूँ अब ,ये पल पल मुझे बताता है …

माँ कहती है, सामान बैग में फ़ौरन डालो,
हर बार तुम्हारा कुछ ना कुछ छुट जाता है…

घर पंहुचने से पहले ही लौटने की टिकट,
वक़्त परिंदे सा उड़ता जाता है…

उंगलियों पे लेकर जाता हूं गिनती के दिन,
फिसलते हुए जाने का दिन पास आता है…

अब कब होगा आना सबका पूछना ,
ये उदास सवाल भीतर तक बिखराता है…

घर से दरवाजे से निकलने तक ,
बैग में कुछ न कुछ भरते जाता हूँ …

जिस घर की सीढ़ियां भी मुझे पहचानती थी ,
घर के कमरे की चप्पे चप्पे में बसता था मैं ,
लाइट्स ,फैन के स्विच भूल हाथ डगमगाता है…

पास पड़ोस जहाँ बच्चा बच्चा था वाकिफ ,
बड़े बुजुर्ग बेटा कब आया पूछने चले आते हैं…

कब तक रहोगे पूछ अनजाने में वो,
घाव एक और गहरा कर जाते हैं…

ट्रेन में माँ के हाथों की बनी रोटियां,
डबडबाई आँखों में आकर डगमगाता है…

लौटते वक़्त वजनी हो गया बैग,
सीट के नीचे पड़ा खुद उदास हो जाता है…

तू एक मेहमान है अब ये पल पल मुझे बताता है…
मेरा घर मुझे वाकई बहुत याद आता है….!!

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अरविन्द कुमार पाल ‘श्रीद ‘ की रचनाएँ

1- जिंदगी यदि सफर मन का है , तो मुस्कुराना होगा,

जिंदगी के रंग तो बहुत हैं , पर एक रंग को पहचानना होगा ,

चाहत है जिस रंग की उस रंग के लिए मुस्कुराना होगा…!!

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2- आइना में सूरत क्या देंखू

दिल की आइना में, खुद को क्या देखूँ ,

बहुत खाई है जीवन में , राहों में खाई क्या देखूँ,

अलग कर लू खुद को खाई से ,

मन की गहराई को क्या देखूँ,

दिल ही है जो मन की गहराई को छू सके,

आँखे ही है जो सुंदरता को ले सके ,

कोई नहीं है ऐसा जो दिल को हरा सके,

सुनो दिल की बात न की मन की खाई से,

जित लो दुनिया को दिल की लड़ाई से..!!

3 –

 

 

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