Poem on Father in Hindi

 

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कविता 1-  !! – वो थे पापा – !!

जब माँ डाँट रहीं थी तो, कोई चुपके से हँसा रहा था,
वो थे पापा,

जब मैं सो रहा था तब कोई चुपके से सिर को सहला रहा था ,
वो थे पापा,

जब मैं सुबह उठा तो कोई बहुत थक कर भी काम पर जा रहा था ,
वो थे पापा,

खुद कड़ी धूप में रह कर कोई मुझे ए.सी. में सुला रहा था,
वो थे पापा,

सपने तो मेरे थे पर उन्हें पूरा करने का रास्ता कोई और बताऐ जा रहा था ,
वो थे पापा,

मैं तो सिर्फ अपनी खुशियों में हँसता हूँ,
पर मेरी हँसी देख कर कोई अपने गम भुलाऐ जा रहा था ,
वो थे पापा,

फल खाने की ज्यादा जरूरत तो उन्हें थी,
पर कोई मुझे सेब खिलाए जा रहा था ,
वो थे पापा,

खुश तो मुझे होना चाहिए कि वो मुझे मिले ,
पर मेरे जन्म लेने की खुशी कोई और मनाए जा रहा था ,
वो थे पापा,

ये दुनिया पैसों से चलती है पर कोई सिर्फ मेरे लिए पैसे कमाए जा रहा था ,
वो थे पापा,

घर में सब अपना प्यार दिखाते हैं पर कोई बिना दिखाऐ भी इतना प्यार किए जा रहा था ,
वो थे पापा,

पेड़ तो अपना फल खा नही सकते इसलिए हमें देते हैं…
पर कोई अपना पेट खाली रखकर भी मेरा पेट भरे जा रहा था ,
वो थे पापा,

मैं तो नौकरी के लिए घर से बाहर जाने पर दुखी था
पर मुझसे भी अधिक आंसू कोई और बहाए जा रहा था ,
वो थे पापा,

मैं अपने “बेटा” शब्द को सार्थक बना सका या नही..
पता नहीं… पर कोई बिना स्वार्थ के अपने “पिता” शब्द को
सार्थक बनाए जा रहा था ,
वो थे पापा…!!

 

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कविता 2- !!- माँ घर का गौरव तो पिता घर का अस्तितव -!!

 

माँ घर का गौरव तो पिता घर का अस्तितव होते हैं,
माँ के पास अश्रुधारा तो पिता के पास संयम होता है..!

दोनो समय का भोजन माँ बनाती है,
तो जीवन भर भोजन की व्यवस्था करने वाले पिता होते हैं..!

कभी चोट लगे तो मुंह से ‘माँ ’ शब्द निकलता है
रास्ता पार करते वक़्त कोई ट्रक पास आकर ब्रेक लगाये तो ‘ बाप रे ’ ही निकलता है.

क्यूं कि छोटे छोटे संकट के लिये माँ याद आती है,
मगर बड़े संकट के वक़्त पिता याद आते हैं..!

पिता एक वट वृक्ष है जिसकी शीतल छाव मे,
सम्पूर्ण परिवार सुख से रहता है…!!!!

 

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कविता 3 – !!- पापा आप बहुत याद आते हैं -!!

 

जिन्दगी तो मेरी कट रही है आपके बाद भी,
मगर आप के बिन जीने में वो बात नहीं…!

उपर से तो सब मेरे अपने ही अपने है,
मगर आप की तरह अन्दर से कोई मेरे साथ नही…!

ख्याल सब रखते है मेरा अपने तरीके से अच्छी तरह,
मगर आपसे जिद करने का मजा अब आता नहीं…!

लडाईयां तो अब भी होती है घर में हमारे,
मगर आपसे वो मीठा मीठा लडने का मजा कोई दे पाता नहीं…!

मै आज भी शाम को दरवाजे पे नजरें टिकाये रहता हूं,
आयेंगे अभी कुछ ले के मै अपने से दिल से बार बार कहता हूं…! 

मगर जब देखता हूं आस-पास आप नहीं होते,
तब सच मानिये आपके ये बच्चे छिप छिप के अकेले में है बहुत रोते हैं..!

भूल थी अगर मेरी तो एक दफा कहते मुझसे,
ऐसे अकेला छोड जाना कोई अच्छी बात नहीं…..!!

 

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