Motivational Poems in Hindi

Motivational Poems in Hindi

Here are a very good interactive Motivational Poems in Hindi, which will definitely encourage you to read.

Hindi Kavita on Life

कोई आपके लिए रूपये खर्च करेगा तो कोई,
समय खर्च करेगा, समय खर्च करने वाले,
व्यक्ति को हमेशा अधिक महत्व और सम्मान देना क्योंकि,
वह आपके पीछे अपने जीवन के वो पल खर्च,
कर रहा है जो उसे कभी वापिस नही मिलेंगे…!!

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रख हौसला वो मंजर भी आयेगा,
प्यासे के पास चल के समन्दर भी आयेगा,
थक कर न बैठ ऐ मंजिल के मुसाफिर,
मंजिल भी मिलेगी…
और मिलने का मज़ा भी आयेगा..!!

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माना दुनियाँ बुरी है सब जगह धोखा है,
लेकिन हम तो अच्छे बने हमें किसने रोका है.
रिश्तो की सिलाई अगर भावनाओ से हुई है
तो टूटना मुश्किल है..
और अगर स्वार्थ से हुई है,
तो टिकना मुश्किल है..!!

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न मैं गिराऔर न मेरी उम्मीदों के मीनार गिरे..!
पर.. लोग मुझे गिराने मे कई बार गिरे…!!”
सवाल जहर का नहीं था वो तो मैं पी गया,
तकलीफ लोगों को तब हुई, जब मैं जी गया.
डाली पर बैठे हुए परिंदे को पता है कि डाली कमज़ोर है ..
फिर भी वो उस डाली पर बैठता है क़्योकीउसको डाली से ज़यादा अपने पंख पर भरोसा है. “…..!!

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अगर इंसान शिक्षा के पहले संस्कार
व्यापार से पहले व्यवहार
भगवान से पहले माता पिता को पहचान ले तो
जिन्दगी में कभी कोई कठिनाई नहीं आयेगी..!!

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सुकून उतना ही देना,  प्रभु जितने से जिंदगी चल जाए,
औकात बस इतनी देना, कि, औरों  का भला हो जाए,
रिश्तो में गहराई इतनी हो, कि, प्यार से निभ जाए,
आँखों में शर्म इतनी देना, कि, बुजुर्गों का मान रख पायें,
साँसे पिंजर में इतनी हों, कि, बस नेक काम कर जाएँ,
बाकी उम्र ले लेना, कि, औरों पर बोझ न बन जाए..!!

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मेहनत सीढियों की तरह होती हैं,
“और”
भाग्य लिफ्ट की तरह
किसी समय लिफ्ट तो बंद हो सकती हैं,
“लेकिन”
सीढियाँ हमेशा उँचाई की तरफ ले जाती है..!!

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वक्त से लड़कर जो नसीब बदल दे,
इन्सान वही जो अपनी तक़दीर बदल दे,
कल क्या होगा कभी मत सोचो,
क्या पता कल वक्त खुद अपनी तस्वीर बदल दे…!!

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इच्छाएँ, सपने, उम्मीदें और नाखून,
इन्हें समय- समय पर काटते रहें,
अन्यथा ये दुखः का कारण बनते हैं……!!

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आंखे कितनी भी छोटी क्यो ना हो !!
ताकत तो उसमे सारा आसमान देखने
की होती है ज़िन्दगी एक हसीन
ख़्वाब है जिसमें जीने
की चाहत होनी चाहिये ग़म खुद ही ख़ुशी
में बदल जायेंगे सिर्फ मुस्कुराने कीआदत
होनी चाहिये..!!

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विकल्प मिलेंगे बहुत, मार्ग भटकानेके लिए,

संकल्प एक ही काफ़ी है, मंज़िल तक जाने के लिए…!!

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Motivational Poems in Hindi

Harivansh Rai Bachchan Ki Kavitayen

Harivansh Rai Bachchan Ki Kavitayen

Harivansh Rai Bachchan Ki Kavitayen ab hindi me. Yaha par unki kuch rachnaye di hui hai.

**** हरिबंश राय बच्चन जी की “अग्निपथ” कबिता ****

Harivansh Rai Bachchan Ki rachna agnipath

 

वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने हों बड़े,
एक पत्र छाँह भी,
माँग मत, माँग मत, माँग मत,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ !

तू न थकेगा कभी,
तू न रुकेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ !

यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रु श्वेत रक्त से,
लथपथ लथपथ लथपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ !!

– हरिवंश राय बच्चन 

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**** हरिबंश राय बच्चन जी की “रोक न पाया मैं आँसू “- कबिता ****

Harivansh Rai Bachchan Ki Kavitayen hindi me

जिसके पीछे पागल हो कर, मैं दौड़ा अपने जीवन भर,
जब मृगजल में परिवर्तित हो, मुझ पर मेरा अरमान हँसा!
तब रोक न पाया मैं आँसू… !!

जिसमें अपने प्राणों को भर, कर देना चाहा अजर–अमर,
जब विस्मृति के पीछे छिपकर, मुझ पर वह मेरा गान हँसा!
तब रोक न पाया मैं आँसू… !!

मेरे पूजन आराधन को, मेरे संपूर्ण समर्पण को,
जब मेरी कमज़ोरी कहकर, मुझ पर मेरा पाषाण हँसा!
तब रोक न पाया मैं आँसू… !!

– हरिवंश राय बच्चन

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**** हरिबंश राय बच्चन जी की “मैं कल रात नहीं रोया था” – कबिता ****

 

मैं कल रात नहीं रोया था,
दुख सब जीवन के विस्मृत कर,
तेरे वक्षस्थल पर सिर धर,
तेरी गोदी में चिड़िया के बच्चे-सा छिपकर सोया था,
मैं कल रात नहीं रोया था..!

प्यार-भरे उपवन में घूमा,
फल खाए, फूलों को चूमा,
कल दुर्दिन का भार न अपने पंखो पर मैंने ढोया था,
मैं कल रात नहीं रोया था..!

आँसू के दाने बरसाकर,
किन आँखो ने तेरे उर पर,
ऐसे सपनों के मधुवन का मधुमय बीज, बता, बोया था?
मैं कल रात नहीं रोया था..!!

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**** हरिबंश राय बच्चन जी की “क्या भूलूं, क्या याद करूं मैं” – कबिता ****

 

अगणित उन्मादों के क्षण हैं,
अगणित अवसादों के क्षण हैं,
रजनी की सूनी की घडियों को किन-किन से आबाद करूं मैं,
क्या भूलूं, क्या याद करूं मैं..!

याद सुखों की आसूं लाती,
दुख की, दिल भारी कर जाती,
दोष किसे दूं जब अपने से, अपने दिन बर्बाद करूं मैं,
क्या भूलूं, क्या याद करूं मैं..!

दोनो करके पछताता हूं,
सोच नहीं, पर मैं पाता हूं,
सुधियों के बंधन से कैसे अपने को आबाद करूं मैं,
क्या भूलूं, क्या याद करूं मैं..!!

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Madhushala Poem in Hindi by Harivansh Rai Bachchan